सारे नागपुर शहर में 17 वर्ष के किशोर जासूस राकेश की काफी चर्चा थी। राज्य स्तर के कुछ बड़े आपराधिक मामलों को सुलझा लेने के बाद अब लोग कहने लगे थे कि वह तीक्ष्ण बुद्धि का, चुस्त एवं विलक्षण युवक है। अखबारों में भी प्रायः उसके बारे में कुछ न कुछ छपता ही रहता था।
अतः राकेश ने महाविद्यालय
की शिक्षा के साथ-साथ ही बतौर प्राइवेट जासूस अपनी प्रैक्टिस आरंभ कर दी थी। उसने अपने जंगले के सामने वाले हिस्से में बाकायदा एक दफ्तर भी बना लिया था। जहां पर मुसीबत में फंसे लोग उससे सहायता लेने आते थे।
फिलहाल ‘जर्मेक्स बियरिंग कंपनी‘ के मैनेजिंग डाइरेक्टर पी. कुमार आधे घंटे से उसके दफ्तर में बैठे उसका इंतजार कर रहे थे।
उनसे मिलने के लिए राकेश भी कम्युनिटी सेंटर में चल रहे पुलिस समारोह को छोड़ कर आया था। राकेश को सूचना मिली थी कि पी. कुमार को उस से बहुत जरूरी काम है।
राकेश ने अपनी मोटर साइकिल दफ्तर के बरामदे में खड़ी की। सामने ही पी. कुमार की कार खड़ी थी। गाड़ी के बगल से गुजरते हुए राकेश अपने दफ्तर में पहुंचा। कुमार साहब सोफे पर न बैठ कर बेसब्री से उसके दफ्तर में टहल रहे थे। राकेश को देख कर वह उसकी ओर लपके।
दफ्तर में घुसते ही राकेश बिना
किसी औपचारिकता के बोला, “बताइए कुमार साहब, क्या जरूरी काम आ गया है? मुझे कम्युनिटी सेंटर में आप का सेक्रेटरी बुलाने गया था।”
“बेटा, मुझे दुख है कि मैंने तुम्हें अचानक ही तकलीफ दी। मैं 2 घंटे बाद ही विमान से एक सप्ताह के लिए अमेरिका जा रहा हूं। उससे पहले मैं तुम्हें एक महत्त्वपूर्ण केस देना चाहता हूं। हमारी कंपनी विभिन्न मशीनों में लगने वाले एक खास किस्म के बियरिंग बनाती है। ये बियरिंग बहुत महंगे होते हैं। पिछले चोर का पता लगा पाने में असफल रही है। बेटे, तुम इस केस को अपने हाथ में ले लो। मैं तुम्हें मुंहमांगी फीस दूंगा।”“आप सिर्फ एक हजार रुपए अग्रिम तौर पर खर्चे के लिए दे दीजिए। आप का केस सुलझ जाने के बाद आप अपनी मरजी से जो इनाम देंगे, मैं ले लूंगा,” राकेश ने कहा।“मंजूर है, तुम शाम को 4 बजे हमारी फैक्टरी में आ कर हमारे जनरल मैनेजर श्रीकांत से मिल लेना। मेरे अमेरिका जाने के बाद वही तुम्हारी मदद करेंगे।”“मुझे पूरी आशा है कुमार साहब, कि आप के अमेरिका से लौटने पर मैं बियरिंग के चोर को आपके सामने खड़ा कर सकूंगा।”“धन्यवाद राकेश, मुझे तुम से यही उम्मीद थी।अब मैं चलता हूं।” कह कर पी.कुमार चले गए।निर्धारित समय पर राकेश जर्मेक्स बियरिंग कंपनी में श्रीकांत से मिला। उन्होंने उसका भरपूर स्वागत किया।
बातों के दौरान राकेश ने पूछा, “आप के बियरिंग गायब कैसे जाते हैं? कृपया पूरी बात सिलसिलेवार बताने का कष्ट करें।”श्रीकांत ने बताया, “हमारे यहां उत्पादन विभाग में बियरिंग बनने के बाद उन्हें ट्राली में भर कर स्टोर में ले जाया जाता है। वहां बियरिंग गिन कर स्टोर विभाग को सौंप दिए जाते हैं।”“बना हुआ माल अगले दिन आर्डर के मुताबिक विभिन्न कंपनियों को, स्टोर से निकाल कर भेजा जाता है। आर्डर की परची दिखाने पर स्टोर वाले कर्मचारी वह माल डिस्पैच विभाग को सौंपते हैं। डिस्पैच विभाग से माल आर्डर के अनुसार पेटियों में भर कर फैक्टरी से बाहर जाता है।”“बियरिंग की चोरी किस स्थान से हो रही है?” राकेश ने पूछा।“करीब 2 महीने पहले स्टोर विभाग के मैनेजर एस.लाल ने आ कर मुझसे शिकायत की थी कि स्टाफ से 260 बियरिंग गायब हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्टोर में काम करने वाले सभी आदमी ईमानदार एवं पुराने हैं। अतः मैंने उनको सलाह दी कि अपना रजिस्टर चेक करो और बियरिंग स्टोर में ढूंढ़ो।“मेरी सलाह पर इस कार्य को पूरा करने में उन्हें पूरा एक सप्ताह लग गया। तब पता चला कि उन 7 दिनों के भीतर फिर 40 बियरिंग गायब हो गए। इस समाचार से हम लोगों को आघात लगा। लेकिन उसके बाद 15 दिनों तक बियरिंग गायब नहीं हुए। 15 दिन के बाद फिर से मैंने उनको स्टाफ चेक करने के लिए कहा। चेकिंग के बाद मालूम पड़ा कि 70 बियरिंग फिर से गायब थे। तब तक हमारा धैर्य समाप्त हो चूका था। अतः हमने इसकी रिपोर्ट पुलिस में की।“पुलिस वाले डंडे लेकर फैक्टरी
में घूमते रहे, चीखे चिल्लाए भी। उसके बाद पूछताछ करके स्टोर के 2 आदमियों को पकड़ कर थाने ले गए। थाने में उन्हें मारा पीटा। 3 दिन हवालात में बंद रखा। बाद में बिना किसी लिखापढ़ी के उन लोगों को छोड़ दिया।”श्रीकांत ने अपनी कहानी जारी रखी, “राकेश, बात इतनी आगे बढ़ जाने के बाद भी चोरी का सिलसिला बंद नहीं हुआ। पिछले दिनों 2 बार स्टाफ रिपोर्ट लेने पर पता चला कि पहली बार 60 और दूसरी बार 50 बियरिंग फिर गायब हो गए। पुलिस वाले हर सप्ताह फैक्टरी में आकर चिखचिल्ला कर हम से अपना खर्चापानी ले जाते हैं। चोरी का पता तो वे लोग लगा नहीं पाते बल्कि हमारे स्टोर के कर्मचारियों से पूछताछ करते रहते हैं। इससे हमारे कर्मचारियों में दहशत बैठ गई है। हमारे कर्मचारी कंपनी प्रबंधकों को जलीकटी सुनाते रहते हैं। वे समझते हैं कि कंपनी प्रबंधक पुलिस साथ साठगांठ करके निर्दोष लोगों की पिटाई कराते हैं। हमारा पुलिस पर अब विश्वास नहीं रहा।